हेलो मैं हूं आपका दोस्त होस्ट RK
आज मैं रिव्यू करने वाला हूं साउथ मूवी ।
जिसका नाम है ईगल(सहदेव)
ये हिंदी डब में रिलीज हुई, और मैंने जा कर देखा तो इसके डायलॉग सुनकर कान के पर्दे फट गए।
ये है डायलॉग: क्या कहा तुमने? अरे उसके आने से पहाड़ भी टूट जाता है उसका नाम सुनते ही बिना गांड़ वाले की भी गांड फट जाए। अरे उसका नाम सुनते ही चर्चगेट स्टेशन का नाम बदल के चर्च गेट स्टेशन से मंदिर गेट स्टेशन हो जाता है। अरे उसका नाम नाम नाम शीट !
इसके साथ एक और डायलॉग है जिसमे बोलता है
चींटी भी हाथी का अंडरवेयर पहनने लग जाती है। मतलब उसका लाभ बस ऐसे ही तेलुगु पैन इंडिया फ़िल्म ईगल स्टार रवि तेजा की फ़िल्म की शुरुआत होती है एंड पूरे फ़िल्म में यही चलता है। 25 बार एंट्री पे एंट्री कराते जाते है रवि तेजा की । साला आधा फायर तो इसकी एंट्री में ही निकल जाती है। जी हाँ गाइस आप लोगों को बता दूँ ईगल एक बड़ी पैन इंडिया फ़िल्म को ग्रैंड रिलीज़ मिला है।
मैं जीस थिएटर में रात को 11:00 बजे पहुंचा। वहाँ पर शो चालू होने को ही नाम नहीं था। फिर कैसे तो करके तीन जन भटके हुए आए थे तो मैंने उनको बोला की आ जाओ तुम वो रवितेजा साहब की ईगल मूवी दिखाता हूँ। थैंक गॉड फ़िल्म कैसे तो करके वो लोगों ने स्टार्ट कर दिया।
मुझे तो लगा की शो ही नही चलेगा
फिर वही तीन जन एक और जन को ढूंढते ताकि वो चार जन मिलकर मेरे को कंधा दे सके की साले तुने ये क्या दिखा दिया?अगर मैं ईगल सहदेव इस फ़िल्म को एक लाइन में रिव्यु करू तो इतना ही कहूंगा की येस गुंटूर कारण इज मास्टरपीस ईगल इस वॅन टाइम वॉच फ़िल्म एंड स्ट्रिक्टली फॉर रवि तेजा फैंस डाइरेक्टर इतना ज्यादा के जी एफ के वर्ल्ड में घुसे है। पब जी के वर्ल्ड में घुसे है की यार सबसे पहले तो उनका मोबाइल छिन लो। कुछ ओरिजिनलिटी देखने को मिलता नहीं है। बट एक दो सीन्स मास एक्शन सीन्स जो आपको सेकंड हाफ में देखने मिलेंगे वो काफी है हाई नजर आता है वही पर थोड़ा ऐसा लगता है की डाइरेक्टर साहब खुद का कुछ कर रहे है इतनी बड़ी प्रोडक्शन लेके वरना बाकी आप देखोगे तो आपको रवि तेजा की पुरानी फिल्मों याद आ जाएगी। बस वो एक ही एक्शन शॉट मेरे को एकदम भारी लगा। वो था वो काली माता वाला जो गन वाला सीन था, ओह हो हो डाट वाज एक्सीलेंट बाकी यार मैं ये सोच रहा हूँ की रवि तेजा इस ए गुड ऐक्टर उसकी एनर्जी इस फ़िल्म में देख लोगे, आपको मज़ा आ जाएगा, लेकिन जो टाइप की वो स्क्रिप्ट चूज करते जा रहे है, वो अपना देखो अभी कम बेक ढूंढ रहे है। जैसे मैं उनके फ़िल्म के लिए ऑडिएंस ढूंढ रहा हूँ। यही हो जाता है। अब देखो इस फ़िल्म में किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी सिवाय बुद्धि की, क्योंकि आपको प्रोडक्शन वैल्यू अच्छा देखने मिल जाएगा। सेट सच्चा देखने मिल जाएगा, क्वालिटी अच्छी देखने मिल जाएगी एंड कास्ट इन्क्लूडिंग तो एकदम बराबर एकदम देखने मिल जाएगा। लेकिन जो स्टोरी रहती है वो कहीं ना कहीं एक दम मजाक लगता है एंड ऐसा लगता है कि यार ये क्यों देख रहा हूं मैं।यार एक सीन था जहाँ पर रवि तेजा हीरोइन को कैसे छेड़ने वाले में स्नैपिंग कर करके उसके आजू बाजू गोली मार रहे, उसको बचा रहे जिसका मन जा रहे उसका पैर ठोक दे रहे एंड वो लड़की वो आदमी बोलती की थोड़ा इधर गोली मारो ना थोड़ा उधर गोली मारो ना। अरे डाइरेक्टर साहब आप तो निकले के जी ऐफ़ का बाप अरे भाई साहब अगर ऐसा प्यार में हम राइफल चलाए ना तो प्यार की माँ का झोपड़ा अलग हो जाए और पुलिस आतंकवादी ठहरा दे हमें वो अलग। ऊपर से रवि तेजा के कैरेक्टर को इतना ही ज्यादा स्मार्ट दिखा दिया की भाई साहब अगर तुम उसके पास आ रहे हो तो उसको पहले ही मालूम पड़ जाता है की तू क्यों आ रहा है, तू कौन है और तू कब गोली चलाएगा? जब मैं बाहर निकलूंगा तो तब गोली नहीं चलेगा क्योंकि मैं हीरो हूँ, तू गांडू है, लेकिन जब मैं अंदर जाऊंगा तो तू बंदूक लेके आएगा तो भी मैं तेरे को पकड़ लूँगा। अरे डाइरेक्टर साहब कोई तो उसको टक्कर लेने लायक दिखाओ। जीसको देख के हम मजा ले फर्स्ट हाफ तो मानो कुछ भी नहीं है। सेकंड हाफ में तो मानो एक दो अक्शॅन सीन अच्छे है, बस यही समझ लो की फ़िल्म इंटरेस्टिंग हो ही नहीं पाती। ना तो नीतीश कुमार जैसा कोई ट्विस्ट है, ना ही पूनम पांडे जैसा कोई झटका। ऊपर से दो घंटा 40 मिनट की फ़िल्म है जिसमे से अगर मैं स्लो मोशन निकाल दू तो सिर्फ 40 मिनट की ही फायर बचेगी।
यार ये क्या है,मजाक चल रहा है, देखी रवि सिर आपका मैं भी फैन हूं लेकिन आपसे एक ही बात कहूंगा। की स्क्रिप्ट और स्टोरी दमदार चुनो। बाकी सब तो मस्त है। तो guys क्या आपने ये फायर देखी? आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताओ।

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